राउरकेला, 20/7:(कलिंग समाचार) आज हेरा पंचमी के अवसर पर, उदितनगर ओरामपड़ा स्थित श्री श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर (श्री गुंडीचा मंदिर) के आड़प मंडप में हनुमान वाटिका श्री जगन्नाथ मंदिर के श्री जगन्नाथ महाप्रभु, बड़े भाई श्री बलभद्र, देवी सुभद्रा और श्री सुदर्शन जी के साथ विराजमान हुए हैं। कर्म वेदी से जन्म वेदी यानी श्री श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर के आड़प मंडप में महाप्रभु का आगमन हुआ है।श्री श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर में आज सुबह महाप्रभु की मंगला आरती के बाद नीति-कांति (धार्मिक अनुष्ठान) के साथ सुबह का धूप-पूजन संपन्न हुआ। दोपहर में ‘आड़प अभड़ा’ (महाप्रसाद) तैयार कर महाप्रभु को भोग लगाया गया और आरती की गई। महाप्रभु के इस आड़प अभड़ा का सेवन करने के लिए उदितनगर, ओरामपड़ा, शीतलपड़ा, पावर हाउस रोड सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।इस आयोजन में श्री श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर के कर्ता सुनाकर नायक, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मंजूसा नायक, पुरोधा श्रीमती सबिता राय, प्रमोद कुमार नायक,सुभाष सिंह बाबुला नायक, डी. उपेंद्र, योगेंद्र नायक, राजू भुयां, उत्तम जयपुरिया, कल्पतरु सेठी तथा ‘रुद्रबाबा अखाड़ा समिति’ के सदस्यों ने उपस्थित रहकर महाप्रसाद वितरण एवं सेवा कार्यों में अपना योगदान दिया।हेरा पंचमी का महत्वभगवान श्री जगन्नाथ, स्नान पूर्णिमा पर स्नान के बाद अस्वस्थ होकर ‘अणसर गृह’ (एकांतवास) में रहे। स्वस्थ होने के बाद वे रथयात्रा के दिन बड़े भाई श्री बलभद्र, बहन देवी सुभद्रा और श्री सुदर्शन जी के साथ अपनी मौसी के घर यानी श्री गुंडीचा मंदिर यात्रा पर चले गए। यह बात माता महालक्ष्मी को ज्ञात नहीं थी।मंदिर में जगन्नाथ महाप्रभु को न पाकर, आज हेरा पंचमी के दिन देवी लक्ष्मी उनसे मिलने (ढूंढने) आईं। किंतु यहाँ भी महाप्रभु से माता लक्ष्मी की भेंट नहीं हो सकी। इस पर क्रोधित होकर माता लक्ष्मी ने रथ का एक हिस्सा (लकड़ी का टुकड़ा) तोड़ दिया और वापस लौट गईं। यही हेरा पंचमी का मुख्य महात्म्य और परंपरा है।आज हेरा पंचमी की रात्रि में माता महालक्ष्मी के मौसी माँ के मंदिर (श्री श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर) आगमन का कार्यक्रम है, जिसके लिए मंदिर समिति की ओर से विशेष तैयारियां की गई हैं।

