राउरकेला:11//11,(कलिंग समाचार) देश में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने के उद्देश्य से आज राउरकेला के होटल मेफेयर में भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम व संगोष्ठी आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम राउरकेला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री(आर सी सी आई) के सहयोग से इसकी मेजबानी में आयोजित हुआ, जिसमें रक्षा क्षेत्र में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों) की संभावनाओं पर विशेष चर्चा की गई।कार्यक्रम का उद्घाटन राउरकेला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष मलय मंडल ने स्वागत भाषण के साथ किया। उन्होंने कहा कि राउरकेला में मौजूद उद्योगों में इतनी क्षमता है कि वे रक्षा सामग्रियों के उत्पादन में योगदान दे सकते हैं। भारत में एमएसएमई क्षेत्र में 27,886 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश होने के बावजूद राउरकेला इसका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा है। इसीलिए, इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह है कि किस प्रकार एमएसएमई इकाइयाँ रक्षा उपकरण निर्माण में योगदान देकर इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ला सकती हैं।उन्होंने कहा कि राउरकेला इस्पात संयंत्र का स्टील जब देश के युद्धपोतों के निर्माण में प्रयोग हो सकता है, तो राउरकेला के छोटे-बड़े उद्योग रक्षा उपकरण क्यों नहीं बना सकते। इसके लिए नीति स्तर पर कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।इस कार्यक्रम में भारत सरकार के रक्षा उत्पादन मंत्रालय के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह, म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (बड़माल ऑर्डनेंस फैक्ट्री, बलांगीर) के अतिरिक्त महाप्रबंधक राम कुमार, एयरोस्पेस एंड डिफेंस अर्नेस्ट एंड यंग एलएलपी, पश्चिम बंगाल के प्रबंधक बलप्रीत सिंह, और एमएसएमई विकास संस्थान, भारत सरकार के संयुक्त निदेशक एस. के. साहू ने भाग लिया।वक्ताओं ने बताया कि राउरकेला के औद्योगिक ढांचे को रक्षा उपकरण उत्पादन के अनुकूल बनाने के लिए परीक्षण सुविधाओं और तकनीकी समर्थन की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में इस दिशा में ठोस योजना बनाकर एमएसएमई क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि राउरकेला देश के रक्षा उत्पादन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित हो सके।कार्यक्रम का संचालन रुद्राणी मित्रा ने किया।

