राउरकेला:17//10,(कलिंग समाचार)सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आर.एस.पी.) के गोपबंधु ऑडिटोरियम में 16 अक्टूबर,2026 को ‘नेतृत्व के सीख : डॉ. सनक मिश्र के साथ चर्चा’ शीर्षक से एक विशेष कार्यक्रमआयोजित किया गया। कार्यक्रम में आर.एस.पी. के निदेशक प्रभारी, श्री आलोक वर्मा मुख्यअतिथि थे, जबकि पूर्व प्रबंध निदेशक डॉ. सनक मिश्र ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचाररखे। आर.एस.पी. के पूर्व निदेशक प्रभारी, डॉ. अतनु भौमिक सम्मानित अतिथि के रूप मेंउपस्थित थे। इस सत्र में भाग लेने वाले लगभग 500 कर्मचारियों को तीन विशिष्टनेतृत्वकर्ताओं के अनुभवों से सीखने का अवसर मिला।अपने संबोधन में डॉ. मिश्र ने प्रतिभागियों को एक असाधारण यात्रा पर ले जाते हुए नकेवल 2000 के दशक के शुरुआती वर्षों में राउरकेला इस्पात संयंत्र के ऐतिहासिक कायाकल्प कीगाथा साझा की, बल्कि नेतृत्व की मूल अवधारणा और एक सच्चे नेता के गुणों पर भी विस्तारसे प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नेतृत्व परिस्थितियों के अनुरूप होता है औरइसे सामान्य सूत्रों के बजाय अपने परिवेश की विशिष्ट वास्तविकताओं के आधार पर विकसितकिया जाना चाहिए। नेतृत्व के मूलभूत स्तंभों की व्याख्या करते हुए डॉ. मिश्र ने कहा कि सच्चेनेतृत्व की शुरुआत व्यक्ति के अंदर से होती है, जिसकी नींव मूल्यबोध, संस्कृति, विरासत औरपरंपराओं पर टिकी होती है। दूसरों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए अपनी सोच,व्यवहार और कार्यों की शक्ति का प्रभावी उपयोग करना ही नेतृत्व का सार है। उन्होंने कहा,‘आज आँकड़ों और सूचनाओं की प्रचुरता है, लेकिन सच्चे नेतृत्व के लिए प्रज्ञा अर्थात गहन धआवश्यक है। यही बोध एक नेता को विभिन्न तथ्यों के बीच संबंध स्थापित करने, नवाचार कोसाकार करने और अल्पकालिक समाधानों तक सीमित रहने के बजाय एक सफल रणनीति तैयारकरने में सक्षम बनाता है।’कार्यक्रम में एक विचार-विमर्श सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें कई युवाकर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए महत्वाकांक्षा, खुशी, प्रेरणा और व्यक्तिगत जिम्मेदारीसे लेकर प्रतिभा को बनाए रखने तथा नेतृत्व में महिलाओं की भूमिका जैसे विविध विषयों परप्रश्न पूछे। डॉ. मिश्र ने प्रत्येक प्रश्न का गहन विवेक के साथ उत्तर देते हुए विषयों के विभिन्नपहलुओं पर व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।डॉ. मिश्र द्वारा प्रस्तुत नेतृत्व के दार्शनिक आधार को डॉ. अतनु भौमिक ने शॉप फ्लोरपर अपने 36 वर्षों के अनुभव से प्राप्त व्यावहारिक ज्ञान के माध्यम से और अधिक प्रभावीबनाया। अपने संबोधन में डॉ. भौमिकने कर्मचारियों को कठिन समस्याओं के समाधान कीदक्षता विकसित करने, परिवर्तन का नेतृत्व करने का साहस रखने, निरंतर सीखते रहने के लिएविनम्र बने रहने तथा सभी को साथ लेकर चलने के लिए संवेदनशीलता अपनाने की सलाह दी।उन्होंने कहा, ‘राउरकेला इस्पात संयंत्र को सेल के मुकुट का रत्न बनाए रखना आपकी जिम्मेदारीहै।’डॉ. मिश्र के ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सत्र के लिए उनके प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्तकरते हुए श्री आलोक वर्मा ने कहा कि संयंत्र के कर्मचारी और उनके परिवार डॉ. मिश्र के प्रतिसदैव ऋणी रहेंगे। उन्होंने संयंत्र को उसके सबसे कठिन दौर से उबारकर एक लाभदायक एवंसमृद्ध इकाई में परिवर्तित करने में डॉ. मिश्र की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंोनेने आगे भी कहा, ‘आज हम उन ऐतिहासिक प्रयासों का लाभ उठा रहे हैं, जो डॉ. मिश्र नेराउरकेला इस्पात संयंत्र को उस दौर से उबारने के लिए किए थे, जब इसके अस्तित्व पर लगभगप्रश्नचिह्न लग चुका था। उन्होंने इसे एक ऐसे प्रतिष्ठान में बदल दिया, जिसकी अनदेखी करनाअब संभव नहीं है।’ निदेशक प्रभारी ने सभी कर्मचारियों से सच्चे नेतृत्व के मूल आधार – साहसको अपनाने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने संयंत्र की निरंतर प्रगति एवं परिवर्तन की यात्रामें नेतृत्व के इन सबकों की स्थायी प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला।कार्यक्रम का समन्वय जनसंपर्क विभाग के सहायक प्रबंधक श्री जॉयदेव मजूमदार नेकिया।

