राउरकेला: 26/5:(कलिंग समाचार) नई दिल्ली जहां एक तरफ स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे सेल्फी लेने में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी तरफ 8,500 करोड़ रुपये की कंपनी ‘डाबर इंडिया’ के उपाध्यक्ष अमित बर्मन की किशोर बेटी दीया बर्मन अपने पिता के पदचिन्हों पर चल रही हैं। बर्मन परिवार की 16 वर्षीय वंशज दीया बर्मन ने एफएमसीजी क्षेत्र में ‘रोगफ्री’ नाम से अपना एक स्टार्टअप शुरू किया है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत के गरीबों, विशेषकर बच्चों में स्वास्थ्य और साफ-सफाई के मानकों में सुधार करना है।दीया ने दिल्ली की सभी प्रमुख होटल श्रृंखलाओं से संपर्क किया है। ताकि वे ओबेरॉय ग्रुप और जेडब्ल्यू मैरियट से लेकर रैडिसन ब्लू तक के इस्तेमाल किए गए और फेंके गए साबुन (साबुन की बट्टियां) प्राप्त कर सकें। इन साबुनों को पहले एक साबुन निर्माण इकाई (मैन्युफैक्चरिंग यूनिट) में भेजा जाता है, जहां इन्हें गर्म करके पिघलाया जाता है। इसके बाद, उनसे नए साबुन तैयार किए जाते हैं और ‘रोगफ्री’ ब्रांड नाम से नए साबुन के सांचे में ढाला जाता है। फिर इन्हें गरीब और ग्रामीण इलाकों के स्कूली बच्चों के बीच मुफ्त में वितरित किया जाता है।दीया ने अपने बयान में कहा कि यह विचार उन्हें तब आया जब वे एक होटल के कमरे में हाथ धो रही थीं। उन्होंने देखा कि हाउसकीपिंग स्टाफ ने सभी इस्तेमाल किए गए साबुनों को बदल दिया था, भले ही वे केवल एक बार ही इस्तेमाल किए गए हों। हर दिन, इन आधे इस्तेमाल किए गए और बिना इस्तेमाल किए गए साबुनों को होटलों द्वारा फेंक दिया जाता है। इसके बाद उन्होंने इन्हें इकट्ठा करने और मुंबई ले जाने का प्रयास किया।फिर उन्होंने कुछ आवश्यक शोध और प्रक्रिया के ज़रिए जाना कि इस्तेमाल किए गए साबुनों को उनके पिघलने के बिंदु (मेल्टिंग पॉइंट) तक गर्म किया जा सकता है, जिससे वे पूरी तरह कीटाणुरहित (स्टेरलाइज्ड) हो जाते हैं, और फिर उनसे एक नया साबुन बनाया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि इस्तेमाल किए गए साबुन के सभी बैक्टीरिया मर जाएंगे और एक बार गर्म करके सांचे में तैयार होने के बाद, यह एक नए साबुन जितना ही अच्छा हो जाएगा। इसी विचार के साथ दीया ने अपना स्टार्टअप ‘रोगफ्री’ शुरू किया।राउरकेला के सिविल टाउनशिप बायपास रोड में रहने वाले समाज से भी उद्योगपति सुरेश अग्रवाल की 17 वर्षीय बेटी समीरा अग्रवाल ने भी दीया का अनुसरण किया है उनके इस कदम से प्रेरणा ली है

