राउरकेला, 12/2:(कलिंग समाचार) विभिन्न ट्रेड यूनियनों सहित कांग्रेस के समर्थन में आज देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है। सीटू इंटक एचएमएस एआईसीटीयू एआईयूटीयूसी जीएमएम, सीईएआर, इंडिपेंडेंट नेशनल फेडरेशन और संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से श्रमिक विरोधी श्रम कोड को रद्द करने, वी.बी.जी. रामजी कानून-2025 को वापस लेने, मनरेगा बचाने, किसान विरोधी बीज विधेयक-2025 और जनविरोधी बिजली विधेयक को वापस लेने जैसी मांगों को लेकर आज देशव्यापी आम हड़ताल एवं प्रदर्शन किया गया आज की इस देशव्यापी आम हड़ताल के कारण दुकानें और बाजार बंद रहे। साथ ही ट्रक, बस और अन्य मोटर वाहनों का आवागमन बाधित हुआ और बैंक एवं अन्य कार्यालय भी बंद रहे।केंद्र की भाजपा मोदी सरकार द्वारा लाए गए श्रमिक विरोधी श्रम कोड को वापस लेने, वी.बी.जी. रामजी कानून-2025 की वापसी, मनरेगा योजना की पुनः बहाली, आवश्यक खाद्य वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों पर नियंत्रण, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण का विरोध, बिजली संशोधन विधेयक-2025 की वापसी और आठ घंटे काम करने के अधिकार को बनाए रखने के लिए देश की सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र कर्मचारी महासंघों के आह्वान पर आज सुंदरगढ़ जिले और राउरकेला में 24 घंटे की हड़ताल और बंद का आयोजन किया गया। इस हड़ताल को सफल बनाने के लिए जनता से इसमें शामिल होने की अपील की गई। हड़ताल में सीटू के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष विष्णु मोहंती के साथ जहांगीर अली, बिमान माईती और कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।राउरकेला शहर एक औद्योगिक नगरी होने के कारण यहाँ विभिन्न ट्रेड यूनियनों सहित संयुक्त किसान मोर्चा, आशा कार्यकर्ताओं और अन्य संगठनों द्वारा चक्का जाम और धरना प्रदर्शन किया गया , जिससे बिरसा चौक पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। राउरकेला बस स्टैंड पर बसें खड़ी रहीं, जबकि बाहर से आए कुछ यात्री बस स्टैंड पर इंतजार करते या सोते हुए देखे गए। ‘आमा बस’ सेवा पूरी तरह बंद रही और बसों को वेदव्यास बेलडिही डिपो में रखा गया। सभी पेट्रोल पंप बंद रहे, बिरसा चौक पर बंद का व्यापक असर देखा गया। पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और केवल नाम मात्र के सुरक्षाकर्मी तैनात किए गई। इन सबके बावजूद राउरकेला शहर में हड़ताल का पूरा असर रहा। सुंदरगढ़ शिल्प मजदूर यूनियन के बैनर तले आईडीसी कलूंगा और सो मिल चौक क्षेत्र में भी धरना प्रदर्शन किया गया, जहां कारखानों में कार्यरत श्रमिकों ने हड़ताल का समर्थन किया और इसमें शामिल हुए, जिसका सीधा असर कारखानों के कामकाज पर भी पड़ा


