राउरकेला,4//2,(कलिंग समाचार): महात्मा गांधी निश्चित रोजगार गारंटी योजना मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग को लेकर आज जिला कांग्रेस की ओर से राउरकेला के अतिरिक्त जिलापाल को एक मांग पत्र सौंपा गया।कांग्रेस ने कहा कि यूपीए सरकार द्वारा 2005 में पारित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा एक अधिकार-आधारित कानून है। यह हर साल 5 से 6 करोड़ ग्रामीण परिवारों को मजदूरी आधारित रोजगार मांगने का कानूनी अधिकार देता था। इसमें लाभार्थियों द्वारा काम की मांग करने के 15 दिनों के भीतर आजीविका प्रदान करना राज्य का कानूनी कर्तव्य था। यदि सरकार रोजगार देने में विफल रहती थी, तो उसे बेरोजगारी भत्ता देना पड़ता था। इस योजना के तहत ग्रामीण मजदूरी में वृद्धि हुई और सामाजिक जीवन में रोजगार को स्थायित्व मिला। इसका मांग-आधारित ढांचा और सीधे बैंक खाते में भुगतान ने विशेष रूप से महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और सीमांत समुदायों को लाभान्वित किया। कुल कार्य दिवसों का लगभग 60% हिस्सा महिलाओं का रहा है।नया कानून बनाम मनरेगा: जिला कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नइ योजना मूल कानून से पूरी तरह अलग है। यह काम की कानूनी गारंटी को समाप्त कर रही है और निर्णय लेने की शक्ति को केंद्र सरकार के हाथों में केंद्रित कर रही है। इस बदलाव से ग्राम सभाओं और पंचायतों की शक्तियां कम होंगी। साथ ही, केंद्र की मजदूरी हिस्सेदारी को 90% से घटाकर 60% करने से राज्यों और श्रमिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

