राउरकेला:9//9,(कलिंग समाचार)कहा जाता है कि घर जलने से बड़ा कोई संकट नहीं होता, क्योंकि इसमें परिवार का सबकुछ पलभर में राख हो जाता है। ऐसा ही एक हादसा बीते तीन सितंबर की रात सेक्टर-1 स्थित मकान संख्या एफ/38 में हुआ, जब रात करीब साढ़े 11 बजे शॉर्ट सर्किट से अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। उस समय घर के मुखिया ड्यूटी पर बाहर थे जबकि पत्नी ममता राम (29) अपने बच्चों अक्षत राम (11) और काव्या राम (8) के साथ घर पर सो रही थीं। उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए बच्चों को लेकर बाहर निकलते समय मुख्य स्विच बंद कर दिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।फिर भी आग में शयनकक्ष के सारे सामान, रसोई, बाथरूम और बरामदे की सामग्री पूरी तरह जलकर खाक हो गई। सूचना पाकर इस्पात संयंत्र के अग्निशमन विभाग ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया और आसपास के घरों को सुरक्षित किया। इस अग्निकांड में मकान मालिक गणेश राम और उनका परिवार सर्वस्व गंवा बैठा। कपड़े, राशन, घर—सब कुछ राख हो गया।गणेश राम मूल रूप से छत्तीसगढ़ के बिलाईगढ़ जिला अंतर्गत सारंगगढ़ के निवासी हैं। रोजी-रोटी के लिए राउरकेला आकर आरएसपी में ठेका श्रमिक के रूप में काम कर अपने छोटे परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। लेकिन इस हादसे ने उनके जीवन की खुशियां छीन लीं।घटना की जानकारी मिलते ही सामाजिक संगठन ‘सहायता’ के अध्यक्ष गोपाल जेना पीड़ित परिवार से मिले और संगठन के अन्य सदस्यों से विचार-विमर्श कर मदद का निर्णय लिया। तय योजना के तहत शनिवार सुबह संगठन के सदस्य एक महीने का राशन, रसोई सामान और कपड़े लेकर गणेश राम के घर पहुंचे और परिवार को यह सामग्री प्रदान की। सहायता पाकर ममता राम की आंखें नम हो गईं। भावुक होकर उन्होंने कहा—“मेरे अपने भी शायद इतना न करते, लेकिन ‘सहायता’ संगठन ने जो किया उसके लिए मैं भगवान से सबकी मंगलकामना करती हूं।”इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष गोपाल जेना, सचिव संजीव कुमार नायक, सदस्य लीना नायक, प्रीति रानी राउत, हेमलता प्रसाद, प्रतिभा प्रियदर्शिनी, अन्नपूर्णा महांती, मिता तराई, विजय प्रसाद, ललित राउत और देवदत्त जेना सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे। ‘सहायता’ संगठन समय-समय पर जरूरतमंदों और गरीबों की मदद के साथ सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करता रहा है।

