राउरकेला, 2//3,(कलिंग समाचार): जंगलों में आग लगने के कारण न केवल हरियाली जलकर खाक हो रही है, बल्कि वन्य जीव-जंतु और पक्षी भी काल के गले में समा रहे हैं। यह आग अक्सर मानवीय कारणों से लगती है, जिसे रोकना अत्यंत आवश्यक है। आज राउरकेला मंडल वन अधिकारी कार्यालय में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में डीएफओ यशवंत सेठी ने जंगल की आग को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।लक्ष्य: वन विभाग ने जंगल की आग की घटनाओं में 50 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा है।हेल्पलाइन नंबर: डीएफओ कंट्रोल रूम की ओर से एक मोबाइल नंबर जारी किया गया है। यदि कहीं भी आग लगने की सूचना मिले, तो नागरिक 8480408924 पर संपर्क कर सकते हैं। आग लगाने वाले असामाजिक तत्वों पर नज़र रखने के लिए वॉच टावरों में कैमरे लगाए गए हैं। जंगली जानवरों और पक्षियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु जंगलों में स्थित नालों और झरनों के पानी को रोककर जगह-जगह गड्ढे खोदे गए हैं।डीएफओ यशवंत सेठी ने जनता से अपील करते हुए कहा कि जंगल की आग पारिस्थितिकी तंत्र का एक हिस्सा हो सकती है, जो कभी-कभी पुनर्जीवन में सहायक होती है, लेकिन अनियंत्रित आग विनाशकारी होती है।”अनियंत्रित आग न केवल जंगलों, घरों और फसलों को नष्ट करती है, बल्कि वन्यजीवों के अस्तित्व को खतरे में डालती है और वायु प्रदूषण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को भी दीर्घकालिक नुकसान पहुँचाती है।”जंगलों के पास कूड़ा न जलाएं।जलती हुई सिगरेट या बीड़ी न फेंकें।आग के इस्तेमाल में लापरवाही न बरतें।अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि हम सब मिलकर प्रयास करें, तभी हम अपने जंगलों और भविष्य को सुरक्षित रख सकते हैं।

