राउरकेला:8//11,(कलिंग समाचार)नगर के महताब रोड में कुरैशी मोहल्ला में जमीअतुल कुरैश की ओर से गौस-ए-आजम की शान में एक भव्य गौस-उल-वरा कॉन्फ्रेंस का आयोजन बड़े अदब और एहतराम के साथ किया गया। कार्यक्रम का आगाज जीनातुल मसाजिद के इमाम हाफिज सनाउल मुस्तफा कादरी ने तिलावत-ए-कुरआन से किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हजरत मोहसिन मियां सोहरवर्दी ने की जबकि मंच संचालन हैदराबाद से तशरीफ लाए सैयद नेमातुल्लाह हुसैनी ने शानदार अंदाज में किया।मुख्य अतिथि के रूप में ब्रिटेन (लंदन) से पधारे गौस-ए-आजम के वंशज, बगदाद शरीफ के शहजादा हजरत शेख हाशिम मंजूरी अल गिलानी ने अरबी और अंग्रेजी में कुरआन व हदीस की रोशनी में तकरीर पेश की। उन्होंने कहा कि इस्लाम का असल पैगाम मोहब्बत, इंसाफ और अमन है। गौस-ए-पाक ने पूरी दुनिया को यह बताया कि इबादत सिर्फ सजदे में नहीं, बल्कि इंसानियत की खिदमत में है।उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब नफरत और तफरके का माहौल बनाया जा रहा है, मुसलमानों को चाहिए कि वे अखलाक, सब्र और इल्म के जरिए इस्लाम की असली तस्वीर दुनिया के सामने पेश करें। उन्होंने कहा कि जो दिल पैगंबर मोहम्मद के इश्क़ से रौशन है, उस पर नफरत कभी हावी नहीं हो सकती। मोहब्बत ही वह ज़रिया है जो हमें अल्लाह के करीब ले जाती है।हजरत गिलानी ने राउरकेला शहर और यहां की आवाम की तारीफ करते हुए कहा कि यहां के लोगों ने जिस तरह मेहमाननवाजी और अदब का सबूत दिया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। मुंबई से आए मशहूर नातख्वां अहमद रजा नूरी ने अपनी प्यारी आवाज़ में नात-ए-पाक पेश कर जलसे को रूहानी माहौल में बदल दिया। उनके कलाम पर उपस्थित लोगों ने नारा-ए-तकबीर,नारा-ए-रिसालत,नारा-ए-हैदरी के जोशीले नारे लगाए।संबोधन में हजरत मोहसिन मियां सोहरवर्दी ने कहा कि आई लव मोहम्मद का नारा सिर्फ जुबान से नहीं बल्कि दिल से बुलंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन्होंने पैगंबर हजरत मोहम्मद की शान में गुस्ताखी की, वे खुद मिट गए लेकिन मोहम्मद का नाम नहीं मिटा सके।राजस्थान के भीलवाड़ा से आए सम्मानित अतिथि मुफ्ती अशरफ जिलानी ने गौस-ए-आजम के जीवन से प्रेरणा लेने पर जोर दिया। उन्होंने राहत इंदौरी का शेर पढ़ते हुए कहा कि किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है…उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्गों ने इस मिट्टी के लिए लहू बहाया है, इसलिए यह मुल्क हमारी पहचान है। साथ ही उन्होंने युवाओं से नशे और गुमराही से दूर रहने की अपील की।कार्यक्रम में गुजरात से सैयद जामी अशरफ, कर्नाटक से मौलाना गुलाम जाफर, अमरावती से मुफ्ती शाहनवाज अली और झारखंड पलामू से गुलाम मुर्तजा ने भी गौस-ए-पाक की शिक्षाओं पर तकरीर पेश की।अंत में, जमीअतुल कुरैश की ओर से हजरत शेख हाशिम मंजूरी अल गिलानी को सर्वश्रेष्ठ इस्लामिक वक्ता के सम्मान से नवाज़ा गया। रातभर चली यह जलसे में या गौस-ए-पाक मदद और दरूद-ओ-सलाम से गूंज उठा।

