राउरकेला,1//11,(कलिंग समाचार): आज गांगपुर मजदूर मंच की ओर से एक पत्रकार सम्मेलन राउरकेला सेक्टर-8 स्थित गांगपुर मजदूर मंच के कार्यालय में आयोजित की गई। मंच के महासचिव गोपाल दास ने कहा कि आगामी यूनियन चुनाव में गांगपुर मजदूर मंच किसी के साथ गठबंधन न करके स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगा।महासचिव गोपाल दास ने आगे बताया कि इस यूनियन की स्थापना आदिवासी, मूलनिवासी और विस्थापित श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए स्वर्गीय जॉर्ज तिर्की के मार्गदर्शन में की गई थी। स्वर्गीय जॉर्ज तिर्की गांगपुर मजदूर यूनियन के पथ-प्रदर्शक और मार्गदर्शक थे। गांगपुर मजदूर मंच के गठन के बाद से ही यह यूनियन स्वतंत्र रूप से श्रमिकों के हित में कार्य करती आ रही है। गांगपुर मजदूर मंच ने शुरुआती दो चुनावों में राउरकेला इस्पात संयंत्र के मान्यता प्राप्त यूनियन चुनाव में भाग लेकर 20 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए थे। श्री दास ने कहा कि राउरकेला इस्पात संयंत्र के श्रमिक गांगपुर मजदूर मंच पर भरोसा करते थे और आज भी करते हैं।शुरुआती दो चुनावों में RIKKS आर आई के के एस बी एम एस ने जीत हासिल की थी और मान्यता प्राप्त यूनियन के रूप में कार्य किया था। लेकिन बाद में आर आई के के एस बी एम एस की श्रमिक विरोधी नीतियों से परेशान होकर और श्रमिक हित को ध्यान में रखते हुए, पिछले दो मान्यता प्राप्त यूनियन चुनावों में गांगपुर मजदूर मंच ने राउरकेला श्रमिक संघ के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। परिणामस्वरूप, पिछले दोनों चुनावों में गांगपुर मजदूर मंच और राउरकेला श्रमिक संघ के गठबंधन ने जीत हासिल की।इस गठबंधन के समझौते के अनुसार, राउरकेला श्रमिक संघ के 60 प्रतिशत और गांगपुर मजदूर मंच के 40 प्रतिशत प्रतिनिधि राउरकेला इस्पात संयंत्र की सभी संयुक्त समितियों में भागीदार रहकर श्रमिक हित में काम कर रहे थे। इस दौरान जे एम एमऔर आर एस एस यूनियन ने मिलकर श्रमिकों के हित में कई काम किए। इसे सहन न कर पाने के कारण RIKKS (BMS) पहले अदालत गया और बाद में मामला वापस ले लिया।गोपाल दास ने कहा कि अब केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों को समेटकर 4 श्रम संहिताओं में सीमित कर दिया है। नई श्रम संहिता की धारा 16 के अनुसार, जो यूनियन 51 प्रतिशत या उससे अधिक वोट हासिल करेगी, वही मान्यता प्राप्त यूनियन बनेगी। यदि किसी भी यूनियन को 51 प्रतिशत वोट नहीं मिलते हैं, तो उस स्थिति में कंपनी एक नेगोशिएबल काउंसिल का गठन करेगी। जिस कारखाने में एक से अधिक यूनियन कार्यरत हैं, वहां 20 प्रतिशत से अधिक वोट पाने वाली यूनियनों का एक-एक प्रतिनिधि इस काउंसिल का सदस्य होगा, और कंपनी इन्हीं सदस्यों के साथ बातचीत करके नीतियां लागू करेगी।श्री दास ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के इस नए लेबर कोड के नियमों से घबराकर RIKKS (BMS) ने सेंट्रल लेबर कमिश्नर के पास आचार संहिता का हवाला देते हुए गांगपुर मजदूर मंच और राउरकेला श्रमिक संघ के गठबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। केंद्रीय मंत्री के दबाव में सेंट्रल लेबर कमिश्नर द्वारा इस गठबंधन को रद्द कर दिया गया और राउरकेला इस्पात संयंत्र की सभी संयुक्त समितियों से गांगपुर मजदूर मंच के प्रतिनिधियों को हटा दिया गया।उन्होंने कहा कि गांगपुर मजदूर मंच हमेशा श्रमिकों, कर्मचारियों और विस्थापित परिवारों के न्यायसंगत अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष करता आ रहा है। लंबे समय से कई महत्वपूर्ण समस्याएं अनसुलझी रहने के कारण श्रमिक समाज के बीच असंतोष और अनिश्चितता बढ़ रही है।इसलिए, गांगपुर मजदूर मंच के महासचिव गोपाल दास ने घोषणा की है कि आगामी यूनियन चुनाव में गांगपुर मजदूर मंच अकेले ही मैदान में उतरेगा।इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में महासचिव गोपाल दास के अलावा कार्यकारी अध्यक्ष मांगे एक्का, उपाध्यक्ष थॉमस टोप्पो, उपाध्यक्ष विष्णु चरण महातो, उपाध्यक्ष राजेश तिर्की, कोषाध्यक्ष आनंद कुमार टोप्पो, सचिव राजू किसान, कार्तिक किशोर बेहरा, महाबीर दास, एन. के. राम, राजू बड़ाइक, जॉन डुंगडुंग, राइदास तिर्की, श्री हरि, भगवान नायक, और लक्ष्मीकांत बेहरा प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

